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इंकलाब…जिंदाबाद..!

 

दोस्तों,

इंकलाब…जिंदाबाद!

मेरे पास बहुत सारे लोगों का मेल आया है कि आपके तीन ही आलेख ब्लॉग पर क्यूं है?

आप क्यों नहीं कुछ लिखते? अगर नहीं लिखते तो ब्लॉग क्यूं खोल रखा है?

आप सही कह रहे है कि मैं कुछ लिख नहीं पा रहा हूं।

वजह ये है कि मैं न कुछ कर पा रहा हूं, ना ही उस दिशा में कुछ सोच पा रहा हूं, जिनसे

आपकी अपेक्षाएं जुड़ी हुई हैं। दुनिया में प्रेम, भाईचारा और अच्छे विचारों को फैलाने का कार्य इतना आसान भी नहीं है।

हम व्यक्तिगत तौर पर समाज के बारे में दिन-रात सोचते तो हैं लेकिन उनके लिए कुछ

कर नहीं पाते। हमारे पास ताकत भी है और कमजोरी भी। मैं भी ठीक आपकी ही तरह हूं।

इसलिए चाहूंगा कि सभी लोग परस्पर संवाद कायम करें न कि सिर्फ मैं अपनी बातें रखूं और

आप लोग बस उसे पढ़कर संतुष्ट हो लें। साथ ही ये मेरा ब्लॉग नहीं, आप सबका है। इंकलाब की विचारधारा का मंच है। कुल तैंतीस मेल ऐसे आएं, जिनमें उन्होंने एक

बार मुलाकात की बात कही है। हम जरूर मिलेंगे। मैं हमेशा आपलोगों के साथ हूं लेकिन आपको बता दूं कि मैं एक साधारण-सा शख्स हूं और ये आपलोगों का बड़प्पन है कि आप मुझे इस कदर सम्मान दे रहें हैं। मैं इसे इंकलाब की विचारधारा का सम्मान समझता हूं। और मिलने से ज्यादा जरूरी है कि हम सबके दिलों में इंकलाब जिंदा रहें, हम लोग एक-दूसरे का हौसला आफजाई करते रहें।

तमाम भाइयों को एक बार फिर से धन्यवाद..!

जय हिंद, जय भारत, वंदे मातरम।

 

आपका-

आदर्श कुमार इंकलाब

 

देर क्यूं..?

 

 

मेरे प्यारे साथियों..!

ये महज एक ब्लॉग नहीं है, वैचारिक क्रांति का सफर है। इस सफर में हम अकेले नहीं हैं, हमें कदम-कदम पर देश के तमाम युवाओं का प्रेम और सहयोग मिल रहा है। हर महीने ढ़ेर सारी चिट्ठियां, मेल्स और लगभग हर दिन देश के कोने-कोने से आनेवाले अजीजों के फोन- इसी बात का सुबूत है कि इंकलाब हमारे-आपके-सबके दिलों में जिंदा है। जिन सपनों के लिए सुभाषचंद्र बोस, वीर भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाकउल्लाह खान जैसे हमारे देश के ना जाने कितने नौजवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी, उन सपनों को जिंदा रखना हमारा-आपका-सबका फर्ज है।

तो कलम उठाइए और शामिल हो जाइए वैचारिक क्रांति के इस सफर में।

हमें आपकी रचनाओं का बेसब्री से इंतजार है।

आप किसी भी विषय पर अपने विचार, लेख, कविताएं, गजल, स्केच भेज सकते हैं।

रचनाएं स्वरचित होनी चाहिए। (एक पेज पर लिखित रूप से पूरे पते, फोन नंबर सहित अपना वक्तव्य भेजें कि- यह मेरी मौलिक, अप्रकाशित-अप्रसारित रचना है)

सर्वश्रेष्ठ आलेख, कविता और गजल के रचनाकार को 15 अगस्त के दिन पुरस्कृत किया जाएगा।

सर्वश्रेष्ठ स्केच और चित्र कलाकार के नाम के साथ इस ब्लॉग पर प्रकाशित किए जाएंगे।

विजेताओं का नाम ब्लॉग पर उनकी रचना के साथ प्रकाशित होगा।

जज होंगे मीडिया समीक्षक एवं लेखक डॉ रामप्रकाश द्विवेद्वी, कवयित्रि डॉ चित्रा सिंह और प्रो. अमित कुमार।

रचनाएं भेजने की अंतिम तारीख 15 जून, 2008 है।

नोट- रचनाएं वर्डपैड पर अटैचमेंट के साथ adarsh_272@rediffmail.com पर भेजें।

आपका-

आदर्श कुमार इंकलाब