जरूरत नए नेतृत्व की..!

नहीं मालूम किसे आप सत्ता सौंपेंगे? शायद ये बात आपको भी पता नहीं है कि आप किसके हाथ देश की बागडोर देना चाहते है। आपके पास भी विकल्पों की कमी नहीं है- कमी है तो महज सही फैसले लेने की क्षमता की। आप सवाल उठा सकते हैं कि हर किसी को अपना फैसला सही और दूसरों से बेहतर लगता है-फिर आप कैसे कह सकते हैं कि मेरा फैसला गलत है।

कह सकता हूं मैं। अपने क्षेत्र के लोगों की बात बताता हूं- अगर आप पूछिएगा कि आप किसे वोट देना चाहते हैं- तो भ्रम की स्थिति कायम है- ये भी अपनी ही जाति का है- वो भी अपनी ही जाति का- हम चाहते हैं मनमोहन फिर से प्रधानमंत्री बने- बेचारा अच्छा आदमी है- इसलिए मजबूरी है कि आरजेडी को देना पड़ेगा- हालांकि एमपी ने कोई काम किया ही नहीं है- इधर नीतिश भी अच्छा काम कर रहा है- लेकिन वो बीजेपी के साथ है-कांग्रेस को भी हमलोग वोट दे सकते हैं। जितनी मुंह-उतनी बातें।

जिस एमपी ने पांच साल में अपने क्षेत्र के लोगों का हाल-चाल पूछने की जरूरत तक न समझी, विकास की बात तो दूर- ऐसे एमपी को भी वोट देने के लिए सोच रहे हैं- किसलिए मजबूरी में- क्या होगा अगले पांच सालों में अगर वो जीत भी जाए तो- कोई काम नहीं होगा- जनता फिर अगले चुनाव का टकटकी लगाए इंतजार करेगी- संभव है फिर वही गलती दुहराए।

यहां सन्नी देओल की तारीख पर तारीख वाला डायलॉग याद आता है..चुनाव पर चुनाव…नतीजा ढ़ाक के तीन पात। मेरा कतई मतलब नहीं है कि आप जेडीयू और कांग्रेस को वोट दे..नो…नेभर..! जेडीयू का उम्मीदवार वो व्यक्ति है जिसे आप जानते तक नहीं फिर उस पर भरोसा कैसे कर सकते हैं- और कांग्रेस ने जिस प्रत्याशी को उम्मीदवार बनाया है- उसका कोई अता-पता नहीं चलता- खास समुदाय के वोट पर निगाह है। राम जाने क्या होगा।

मैं बस इतना चाहता हूं कि इन बड़ी पार्टियों द्वारा चुने गए इन अजीबो-गरीब नेताओं के बदले क्यों नहीं आप अपने बीच से किसी व्यक्ति को चुनें-उस पर भरोसा करें- ये फैसला इससे तो बेहतर ही है कि पुराने अकर्मण्य सांसदों को फिर से मजबूरी की माला पहनाएं। इस बार न सोच सके तो 2014 के लिए तैयार रहें। साथ मिलकर कुछ न कुछ करें।
आदर्श बाबू आप बुद्धिजीवी है, दिल्ली में रहते हैं- पत्रकार हैं- आप तो क्षेत्र के लिए समय देने से रहे- आप ही कुछ उपाय सुझाएं- आखिर आपका दायित्व बनता है- जिस मिट्टी से आप आए हैं- हमलोगों को आप पर भरोसा है कि आप कुछ न कुछ करें अपनी जन्मभूमि के लिए। नमस्कार..!

शेखर यादव, सीतामढ़ी।

Advertisements

2 responses to “जरूरत नए नेतृत्व की..!

  1. शेखर बाबू, आपका पत्र देर से प्रकाशित करने के लिए माफी चाहता हूं। दरअसल आपका मेल जंक मेल में चला गया था- जिसकी वजह से देर से मैं देख पाया। आप जागरुक हैं- इस बात की खुशी है। आप जब इस दिशा में सोच रहे हैं तो कुछ न कुछ जरूर होगा- मेरी शुभकामनाएं आपके साथ है।

    आपका- आदर्श कुमार इंकलाब।

  2. शेखर बाबू
    ,

    अच्‍छे विचारों के लिए आपको बधाई ! आपने सही फरमाया है. मैं तो यही चाहूंगा कि लोग अपनी सुख-सुविधा के कतर-ब्‍यौंत से तनिक-मनिका समय निकाल के बेहतर समाज बनाने के लिए आगे आएं. दिक्‍कत तो ससुरी उहे न है, घर, परिवार, माय-बाबूजी, बाल-बच्‍चा …..

    इन ज़रूरी कामों से समय बचे तब न आदमी व्‍यापक सामाजिक हित के बारे में सोच पाएगा. पर आप जैसे आदर्श लोगों से तो उम्‍मीद की जा सकती है. क्‍या कहते हैं मित्र?

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s