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Archive for June, 2008

उस स्‍त्री ने बच्‍ची को नहलाया
कपड़े पहनाए
और फिर
आरती पर
साथ लेकर बैठ गयी उसे।
बच्‍ची ने हाथ जोड़े
प्रसाद खाया
और जैसे-जैसे माँ करती गयी
नकल उतारती रही वह
सुबह शाम
घंटी बजाने की जिद
धूप सुलगाने की ललक
बच्‍ची में
पनपती चली गयी माँ की तरह।
दिन बीते
अब वह बड़ी हो गयी थी
माँ से सोचती थी अलग
कुछ बताती थी
और ज्‍यादा छिपाती थी।
अलग अस्तित्‍व
पहचान की [...]

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मेरे भारत की आजादी, जिनकी बेमौल निशानी है।
जो सींच गए खूं से धरती, इक उनकी अमर कहानी है।

वो स्वतंत्रता के अग्रदूत, बन दीप सहारा देते थे।
खुद अपने घर को जला-जला, मां को उजियारा देते थे।

उनके शोणित की बूंद-बूंद, इस धरती पर बलिहारी थी।
हर तूफानी ताकत उनके, पौरुष के आगे हारी थी।

मॉ की [...]

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लड़की
घर से निकलती थी
करने को काम
बस में लड़ती थी
सड़कों पर भी जारी थी उसकी जंग
आफिस में बॉस की निगाहों से जूझती थी
रोज लड़की
मॉं-बाप की चौकस निगरानी
भाई की बहादुरी की कहानी
से लड़ती थी लड़की
अपनी आदिम पनाहगाह में भी
अल्ट्रासाउंड की किरणों से युद्धरत थी लड़की
अकेले
आधुनिक सभ्यता
इस घनघोर वैज्ञानिक तार्किक
और विवेकवान समय में
आफिस से घर तक
सुबह से शाम [...]

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