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Archive for May 13th, 2008

कोलाहल है मचा
धरती रही उबल
इंसान की फितरत में
नहीं है सुधरने का शगल 

पृथ्वी तप रही है। इंसान को इसकी चिंता नहीं है। हो भी क्यों। उसके घर में एसी है, कूलर है, पंखा है। हिमखण्ड पिघल रहे है। नदियां उफान पर है। पर इंसान क्या करें। उसके घर, पानी है, फ्रिज है, बर्फ है। खेतों में [...]

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