अंधेरे आकाश के नीचे
May 6, 2008 by inqalabjindabad
अंधेरे आकाश के नीचे
तारों के साथ
लंबी बात करना
तुम्हे अच्छा लगता है अभी भी
यह जानकर सुखद आश्चर्य होता है।
जब दुनिया में घिसावट
का दौर चल रहा हो
तब तुम्हारी संवेदना बनी रहे अक्षत
इसे मैं सौभाग्य ही कहूंगा।
पर विश्वास रखो तुम
तुम्हारा कहा ही नहीं
अनकहा भी समझ लेता हूं मैं।
वेदना स्वत: एक संवाद है।
तुम शांति से निकल कर शोर में
गुम हो जाती हो
मैने शोर में ही अपनी शांति पा ली है।
एक दिन जब हम शांत हो जाएंगे
नहीं होंगे शिकवे-शिकायत
पर शोर मचेगा चारों ओर
शायद
और हम रहेंगे नि:शब्द
चिर मौन।
- डॉ. राम प्रकाश द्विवेदी 

बहुत खूबसूरत रचना है महाशय।
bahut badiya