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Archive for May 6th, 2008

 
अंधेरे आकाश के नीचे
तारों के साथ
लंबी बात करना
तुम्‍हे अच्‍छा लगता है अभी भी
यह जानकर सुखद आश्‍चर्य होता है।
जब दुनिया में घिसावट
का दौर चल रहा हो
तब तुम्‍हारी संवेदना बनी रहे अक्षत
इसे मैं सौभाग्‍य ही कहूंगा।
पर विश्‍वास रखो तुम
तुम्‍हारा कहा ही नहीं
अनकहा भी समझ लेता हूं मैं।
वेदना स्‍वत: एक संवाद है।
तुम शांति से निकल कर शोर में
गुम [...]

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माँ( … माँ …. अब बच्ची थोड़े न हूँ , ये गुरुर भी जाने कब पैदा हो गया था। )
बारिश-लोग-अकेलापन-रात…
हट पागल
भूत थोड़े न कुछ है…टन टन
घड़ी ढाई बजा कर मुंह चिढ़ा रही थी !
प्यार हुआ -इकरार हुआ के गीत के बिना बेमतलब की बरसात !
कहा जाऊँ ?
किसी को तो नहीं जानती , इस [...]

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